वंदे मातरम् भारत माता के प्रति श्रद्धा, त्याग और आत्मगौरव की एक भावपूर्ण अभिव्यक्ति है। यह वही गीत है जिसने स्वतंत्रता संग्राम के समय करोड़ों भारतीयों के हृदय में देशभक्ति की ज्वाला प्रज्वलित की और आज भी राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक बना हुआ है।
इस लेख में आप जानेंगे
- वंदे मातरम् का अर्थ
- वंदे मातरम् किसने लिखा
- इसका इतिहास, भाषा और राष्ट्रीय महत्व
- वंदे मातरम् का पूर्ण संस्करण
वंदे मातरम् किसने लिखा? (Who wrote Vande Mataram)
वंदे मातरम् की रचना महान साहित्यकार बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय (Bankim Chandra Chattopadhyay) ने की थी।
यह गीत उनके प्रसिद्ध उपन्यास आनंद मठ (Anand Math) में पहली बार प्रकाशित हुआ।
तो यदि आपके मन में प्रश्न है “वंदे मातरम् किसने लिखा” (Vande Mataram kisne likha)
तो उत्तर है: बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय।

वंदे मातरम् किस भाषा में लिखा गया?
(Vande Mataram written in which language)
वंदे मातरम् मूल रूप से संस्कृतनिष्ठ बंगला भाषा में लिखा गया है, जिसमें संस्कृत शब्दों की प्रधानता है।
इसी कारण यह गीत भारत के हर कोने में सहज रूप से स्वीकार किया गया।
और पढ़े: Vande Mataram at 150 Years : History and Significance of the National Song of India
वंदे मातरम् गीत (Vande Mataram Lyrics in Hindi)
वन्दे मातरम् ।
सुजलां सुफलां मलयजशीतलाम्,
शस्यश्यामलां मातरम् ।
वन्दे मातरम् ॥ १ ॥
शुभ्रज्योत्स्ना-पुलकित-यामिनीम्,
फुल्लकुसुमित-द्रुमदल-शोभिनीम्,
सुहासिनीं सुमधुर भाषिणीम्,
सुखदां वरदां मातरम् ।
वन्दे मातरम् ॥ २ ॥
कोटि-कण्ठ-कल-कल-निनाद-कराले,
कोटि-भुजैर्धृत-खरकरवाले,
अबला केन मा एत बले,
बहुबलधारिणीं मातरम् ।
वन्दे मातरम् ॥ ३ ॥
तुमि विद्या, तुमि धर्म,
तुमि हृदि, तुमि मर्म,
त्वं हि प्राणाः शरीरे ।
बाहुते तुमि मा शक्ति,
हृदये तुमि मा भक्ति,
तोमारै प्रतिमा गड़ि
मन्दिरे-मन्दिरे ।
वन्दे मातरम् ॥ ४ ॥
त्वं हि दुर्गा दशप्रहरणधारिणी,
कमला कमलदल-विहारिणी,
वाणी विद्यादायिनी, नमामि त्वाम् ।
नमामि कमलां, अमलां, अतुलाम्,
सुजलां सुफलां मातरम् ।
वन्दे मातरम् ॥ ५ ॥
श्यामलां सरलां सुस्मितां भूषिताम्,
धरणीं भरणीं मातरम् ।
वन्दे मातरम् ॥ ६ ॥

वंदे मातरम् का अर्थ (Vande Mataram Meaning in Hindi)
“वंदे मातरम्” का अर्थ है – मैं मातृभूमि को नमन करता हूँ।
यह गीत भारत भूमि को जीवनदायिनी माता, हरित-श्यामला, अन्नपूर्णा, एवम् शक्ति, भक्ति और ज्ञान की अधिष्ठात्री के रूप में प्रस्तुत करता है।
यह गीत देश की केवल भौगोलिक राष्ट्र नहीं, बल्कि जीवंत देवी स्वरूप भारत के रूप में स्तवन करता है।
वंदे मातरम् और राष्ट्रीय पहचान
- वंदे मातरम् भारत का राष्ट्रीय गीत है
- इसे राष्ट्रीय अवसरों, विद्यालयों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों में गाया जाता है
- यह गीत भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की आत्मा को जीवित रखता है
हालाँकि इसे राष्ट्रगान नहीं कहा जाता, फिर भी इसका स्थान राष्ट्रीय चेतना में सर्वोच्च है।

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वंदे मातरम् के १५० वर्ष (Vande Mataram 150 Years)
वंदे मातरम् के १५० वर्ष पूरे होना केवल एक साहित्यिक उपलब्धि नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक स्मृति का उत्सव है। आज भी यह गीत नई पीढ़ी को अपने राष्ट्र से जोड़ता है।
वंदे मातरम् भारत की आत्मा की पुकार है।
यह हमें स्मरण कराता है कि स्वतंत्रता, संस्कृती और राष्ट्रबोध – तीनों एक साथ चलते हैं।
वंदे मातरम्। 🇮🇳🇮🇳🇮🇳

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
वंदे मातरम् किसने लिखा? (Vande Mataram Kisne Likha)
वंदे मातरम् को बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने लिखा।
वंदे मातरम् राष्ट्रीय गीत है या राष्ट्रगान?
वंदे मातरम् भारत का राष्ट्रीय गीत है, जबकि जन गण मन राष्ट्रगान है।
वंदे मातरम् किस भाषा में लिखा गया?
यह गीत संस्कृतनिष्ठ बंगला भाषा में लिखा गया।
वंदे मातरम् का अर्थ क्या है?
इसका अर्थ है – मैं मातृभूमि को नमन करता हूँ।
वंदे मातरम् किस पुस्तक में प्रकाशित हुआ था?
यह गीत आनंद मठ (Anand Math) उपन्यास में प्रकाशित हुआ था।
वंदे मातरम् कब लिखा गया था?
महान साहित्यिक बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने वंदे मातरम् गीत १८७५ में लिखा था |
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